SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 733
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ७२० भनुयोगद्वार अथ क्षायोपशमिकं नाम निरूपयति मूलम्-से किं तं खओवसमिए ? खओवसमिए दुविहे पण्णत्ते, तं जहा-खओवसमे य, खओवसमनिप्फण्णे य। से किं तं खओवसमे ? खओवसमे चउण्हं घाइकम्माणं खओवसमेणं, तं जहा-णाणावरणिज्जस्स, दंसणावरणिजस्त, मोहणिजस्स, अंतरायस्स, खओवसमेणं, से तं खओवसमे। से किं तं खओवसमनिप्फण्णे ? खओवसमनिप्फण्णे अणेगविहे पण्णत्ते, तं जहा खओवसमिया आभिणिबोहियणाणलद्धी, जाव खओवसमिया मणपजवणाणलद्धी, खओवसमिया मइअण्णाणलद्धी, खओव. समिया सुयअण्णालद्धी, खओवसमिया विभंगणाणलद्धी, खओवसमिया चक्खुदसणलद्धी, अचक्खुदंसणलद्धी ओहिदंसणलद्धी, एवंसम्मदंसणलद्धी मिच्छादसणलद्धी, सम्ममिच्छादसणलद्धी, खओवसमिया सामाइयचरित्तलद्धी, एवं छेयोवटावणलद्धी, परिहारविसुद्धियलद्धी, हुमसंपरायचरित्तलद्धी, एवं चरित्ताचरित्तलद्धी, खओवसमिया दाणलद्धी, एवं लाभलद्धी, भोगलद्धी, उवभोगलद्धी, खओवसमिया वीरियलद्धी, एवं पंडियवीरियलद्धी, बालवीरियलद्धी, बालपंडियवीरियलद्धी, खओवसमिया सोई. दियलद्धी, जाव खओवसमिया फासिंदियलद्धी, खओवसमिए आयारंगधरे, एवं सुयगडंगधरे, ठाणंगधरे, समवायंगधरे, विवाहपण्णत्तिधरे, नायाधम्मकहाधरे, उवासगदसाधरे, अंतगडदसाधरे, अणुत्तरोववाइयदसाधरे, पण्हावागरणधरे, विवागसुक्षरे
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy