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________________ ६७८ अनुयोगद्वारसूत्र त्ति नामियं, खलु ति नेवाइयं, धावइत्ति अक्खाइयं, परित्ति ओवसग्गियं, संजए त्ति मिस्सं। से तं पंचनाम ॥सू०१५०॥ ___ छाया-अय किं तत् पश्चनाम? पश्चनाम पश्चविधं प्रज्ञप्तम् , तद्यथानामिक, नैपातिकम् , आख्यातिकम् , औपसर्गिकं, मिश्रम् । अश्व इति नामिकम् । 'खलु' इति नैपातिकम् । 'धावति' इति आख्यातिकम् । 'परि' इति औपसर्गिकम् । संयत इति मिश्रम् । तदेतत् पश्चनाम ॥मू० १५०॥ टीका-'से कि तं' इत्यादि शिष्यः पृच्छति-अथ किं तत् पश्चनाम ? इति। उत्तरयति-पश्चनाम-पञ्च. प्रकारकं नाम-पश्चनाम, तद्धि पञ्चविधं प्रज्ञप्तम्। पञ्चविधत्वमेवाह-नामिकमित्यादि । तत्र-अश्व इति नामिकम्-वस्तुवाचकत्वात् । 'खलु' इति नैपातिकम्निपातेषु पठितत्वात् । धावतीति आख्यातिकं क्रियाप्रधानत्वात् । 'परि' इति अब सूत्रकार पश्चनाम का निरूपण करते हैं" से किं तं पंचनामे" इत्यादि। शब्दार्थ-(से किं तं पंचनामे ? ) हे भदन्त ! पंचनाम क्या है ? उत्तर-(पंचनामे पंचविहे पण्णत्ते) पंच नाम पांच प्रकार का प्रज्ञप्त हुआ है। (तं जहा) उस के पांच प्रकार ये हैं-(नामियं, णेवाइयं, अक्खाइयं, ओवसग्गियं मिस्स) नामिक नैपातिक, आख्यातिक, औपसर्गिक, और मिश्र। वस्तु का वाचक होने से (आसेत्ति नामिय)-अश्व यह शब्द नामिक है । (खलुत्ति नेवाइयं) खलु शब्द निपातों में पठित होने के कारण नैपातिक है। क्रियाप्रधान होने से (धावत्ति अक्खाइयं) धावति" यह तिङ्गन्त पद आख्यातिक है। (परित्ति ओवसग्गियं) परि वे सूत्र.२ ५यनामनु नि३५२ २ - “से किं तं पंचनामे" त्याहशहाथ-(से किं तं पंचनामे १) सन् ! ५'याम अने ४ छ ? उत्तर-(पंचनामे पंचविहे पण्णत्ते) ५यनाम पांय ना छे. (तंजहा) । नाये प्रभार -(नामियं, णेवाइयं, ओवसग्गिय, मिस्स) (१) नाभि, (२) नाति, (3) आध्याति, (४) भोपसन भने (५) मिश्र. वस्तुनु वा पाने १२ (आसेत्ति नामिय) "A" ५४ नाभि४ २६५ ३५ सभा (खलुत्ति नेवाइयं) "म" ५७ नाwi १५२रातु पाने ४२ नेपातिना २५ ३५ सभा (धावइत्ति अक्साइयं) "धावति" मा ५४ याप्रधान पाने र भाभ्यातिन BIR
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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