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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र १५० पञ्चनामनिरूपणम् अथ पञ्चनाम निरूपयितुमाह मूलम्-से किं तं पंचनामे ? पंचनामे-पंचविहे पण्णत्ते, तं जहा-नामियं णेवाइयं अक्खाइयं ओवसग्गियं मिस्सं। आसे दण्ड+ मग्गं दण्ड+अग्रम् सा आगया, दहि+इणं, नई+ईह महु+उदर्ग, यह ऊहो, इन विकार निष्पन्न नामों में सर्वत्र दीर्घरूप विकार हुआ है। वर्ण के स्थान में दूसरे वर्ण का होना इसका नाम विकार है तथा उस उस रूप से परिणमन होनो इसका नाम नाम है। विकार होने पर इनका "दंडग्गं साऽऽगया, दहीणं, नईह महदगं, वहहो" ऐसा रूप हो जाता है। लोक में जितने भी शब्द हैं वे आगम आदि किसी एक से निष्पन्न हुए ही होते हैं। तथा "डिस्थ डविथ आदि जो शब्द अव्युत्पन्न किन्हीं२ के द्वारा माने हुए हैं वे भी शाकटायन के मत में व्युत्पन्न ही माने गये हैं। उक्तंच-नाम च धातुजमाह निरूक्ते व्याकरणे शकटस्य च तोकम् । यन्न पदार्थविशेषसमुत्थं, प्रत्ययतः प्रकृतेश्च तदह्यम्" इस प्रकार समस्त शब्दों का इन आगमादि चारों से संग्रह हो जाता है इसलिये आगमादिक चतुर्नाम कहे जाते हैं ॥सू० १४९॥ "दंड+अग्गं सा+आगया दहि+इणं, नई+इह, महु+उदगं, अने बहू+हो" सा मां पहोम सन्धि ३५ १ि४.२ ने " अम, सागया, दहीणं, नईह, महूदगं, बहहो" त्य: विपन्न नामे मन्य छे. असे વર્ણને સ્થાને બીજા વર્ણને પ્રેમ છે તેનું નામ વિકાર છે. જે નામમાં આ પ્રકારનું પરિણમન થયું હોય છે, તે નામોને વિકારપિન નામ કહે छ. "दंड+अग्गं" मा ७५युत पोमा सन्धिने ये वि२ ५४ पाथी " दण्डान, साऽऽगया, दहीणं, नईह, महूदगं वहूहो । १२नां ३॥ सनी ગયાં છે. લેકમાં જેટલાં શબ્દો છે, તેઓ આગમ આદિ પૂર્વોક્ત ચાર प्रशमनमे ४॥नि०५-न येता डाय छे. तथा "डित्य हवित्थ" આદિ જે શબ્દને કઈ કઈલેકે દ્વારા અયુત્પન્ન માનવામાં આવે છે, પરન્તુ શાકટાયનના મત અનુસાર તેમને પણ વ્યુત્પન જ માનવામાં આવેલ . धुं ५ -" नाम च धातुजमा निरुक्ने व्याकरणे शकटस्य च तोकम् यन्न पदार्थविशेषसमुत्थं, प्रत्ययतः प्रकृतेश्च तदूह्यम्” मा प्रकारे સમસ્ત પદેને આ આગમ આદિ ચારેમાં સમાવેશ થઈ જાય છે. તેથી આગમાદિ ૩૫ ચતુર્નામ રૂપે અહીં તેમને પ્રતિપાદિત કરવામાં આવેલ છે. સૂ૦૧૪
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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