SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 660
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र १३५ त्रिनामनिरूपणम् ६४७ बोध्यम् । त्रैविध्यमेवाह - तद्यथा द्रव्यनाम- द्रवति = गच्छति तांस्तान् पर्यायान् प्राप्नोतीति द्रव्यं तस्य नाम- द्रव्यनाम । गुगनाम-गुण्यन्ते= संख्यायन्ते इति गुणास्तेषां नाम-गुणनाम । तथा-वर्णनाम-वर्ण्यते = अलङ्क्रियते वस्त्वनेनेति वर्णः, तस्य नाम वर्णनाम । एषु त्रिविधेषु नामसु प्रथमं द्रव्यनाम जिज्ञासमानः शिष्यः पृच्छति - अथ किं तद् द्रव्यनाम ? उत्तरयति - द्रव्यनाम हि धर्मास्तिकायादिभेदैः षड्विधम् । धर्मास्तिकायादीनां व्याख्या पूर्व कृता । गुणनामतु वर्णगन्धरसस्पर्श शब्दार्थ - - (से किं तं तिनामे ?) हे भदन्त ! त्रिनाम क्या है ? उत्तर -- (तिनामे तिविहे पण्णत्ते) त्रिनाम तीन प्रकार का कहा गया है तीन रूप वाला जो नाम है वह त्रिनाम है ! त्रिनाम से ही यह त्रिविध है । (तं जहा) वे तीन प्रकार ये हैं-- (दव्वणामे, गुणनामे, पज्जवणामे) द्रव्यनाम, गुणनाम, पर्यव नाम । उन २ पर्यायों को जो प्राप्त करता है उसका नाम द्रव्य है । इस द्रव्य का जो नाम है वह द्रव्यनाम है। जो गिने जावें उनका नाम गुण है यह गुण शब्द की व्युत्पत्ति है। इनका जो नाम है वह गुण नाम हैं। पर्याय का जो नाम है वह पर्याय नाम है । पर्याय नाम का वर्णन सूत्रकार १४७ वें सूत्र में करेंगे। (सेकिं तं दव्वनामे) वह द्रव्य नाम क्या है ? उत्तर -- (दव्वणामे छव्विहे पण्णत्ते) द्रव्य नाम ६ प्रकार का कहा है । (तं जहा) जैसे- (धम्मस्थिकाए, अचम्मत्थिकाए, आगासत्थिकाए शब्दार्थ - (से किं त' तिनामे १) हे भगवन् ! त्रिनाभ भेटले शु? उत्तर- (तिनामे तिविहे पण्णत्ते) त्रिनाभना त्र र छेत्र ३५વાળુ' જે નામ છે, તેને ત્રિનામ કહે છે ત્રિનામ હોવાને લીધે જ તે ત્રણ प्रानुं छे. (तजहा) ते त्र प्रहारो नीचे प्रभाशे छे - ( दुब्वणामे, गुणनामे, पब्जवणामे) (१) द्रव्यनाभ, (२) गुशनाभ भने ( 3 ) पर्ययनाभ (पर्यायनाभ.) જુદી જુદી પર્યાયાને જે પ્રાપ્ત કરે છે, તેનું નામ દ્રવ્ય છે. આ દ્રવ્યનું જે નામ છે તેને દ્રવ્ય નામ કહે છે. ગુણુ શબ્દની વ્યુત્પત્તિ આ પ્રમાણે છે. " गाय ते शुद्ध छे." તે ગુણનું જે નામ છે તેને ગુણુનામ કહે છે. પર્યાયનું જે નામ છે, તેનું નામ પર્યાયનામ છે, આગળ ૧૪૭માં સૂત્રમાં સૂત્રકાર આ પર્યાયનામનુ વણ્ન કરવાના છે. प्रश्न - ( से किं तदव्वनामे ? ) ते द्रव्यनाम शु छे ? उत्तर- (दव्वणामे छवि पण्णत्ते) द्रव्यनाम छ प्रा२नुं थुं छे. (त'जहा) भेभ है....(धम्मत्थिकाए, अधम्मत्थिकाए, आगास्रत्थि काए, जीवत्थिकार, पुग्गलत्यि
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy