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________________ ४३६ भनुयोगद्वारखे पूर्वानुपूर्वीत्वाद्यसंभवः, अतोऽत्र पुद्गलास्तिकाय एव पूर्वानुपूर्वीस्वादिकोदाहता, नत्वन्ये धर्मास्तिकायादय इति । सदेतदुपसंहरन्नाह-' से तं' इत्यादि । सैषा अनानुपूर्वीति । औपनिधिको द्रव्यानुपूर्वी सम्पूर्णति सूचयितुमाह-से तं ओवणिहिया' इत्यादि । सैषा औपनिधिकी द्रव्यानुपूर्वीति । ज्ञायकशरीरमव्यशरीव्यतिरिक्ता द्रव्यानुपूर्वीसंपूर्णेति सूचयितुमाह-'से तं जाणयसरीरभवियसरीर वारित्ता' इत्यादि-सैषा ज्ञायकआदि द्रव्यों में तो विषमप्रदेशिकता है इसलिये वहां पूर्वपश्चाद्भाव है। तथा जो अद्धासमय है वह एकसमयरूप है इसलिये उसमें भी पूर्वानु पूर्वी आदि संभवित नहीं है इसलिये पुगद्लास्तिकाय ही पूर्वानुपूर्वी आदिरूप से उदाहृत किये गये हैं अन्य धर्मास्तिकाय आदि द्रव्य नहीं। (से तं अणाणुपुव्वी) इस प्रकार यह अनानुपूर्वी है । (से तं ओवणिहिया व्वाणुपुत्वी) यहांतक पूर्व प्रकान्त ओपनिधिकी द्रव्यानुपूर्वी का कथन किया गया है । ( से तं जाणयसरीरभवियसरीरवहरित्ता दव्वाणुपुन्वी ) इस प्रकार औपनिधिकी द्रव्यानुपूर्वी का कथन समाप्त होते ही ज्ञायक शरीर भव्य शरीरव्यतिरिक्त द्रव्यानुपूर्वी समाप्त हो जाती है । (से तनो आगमओ दवाणुपुवी-से तं दवाणुपुव्वी) इस कथन की समाप्ति होते ही नोआगम को आश्रित करके जायमान द्रव्यानुपूर्वी का स्वरूप समाप्त हो जाता है । इसप्रकार यह द्रव्यानुपूर्वी है। પ્રાદેશિકતા છે, તેથી ત્યાં પૂર્વપશ્ચાદ્ભાવ છે તથા જે અદ્ધા સમય સંભવિત નથી તેથી પુદ્ગલાસ્તિકાયનું જ પૂર્વાનુપૂર્વી આદિ રૂપે ઉદાહરણ આપવામાં આવ્યું છે, અન્ય ધર્માસ્તિકાય આદિ દ્રવ્યનું તે પ્રકારે ઉદાહરણ આપવામાં मा०यु नथी. ( से त अणाणुपुत्री) मा प्रा२नु अनानुपूर्वानु. २५३५ छे. (से त ओवणिहिया दव्वाणुपुव्वी) भी सुधीमा पूर्व प्रस्तुत भोपनिधिही द्रव्यानुभूतीनु ४थन ४२पामा भायु छे. (से त' जाणयसरीरभवियसरीरवइरित्ता दव्वाणुपुव्वी) मा रीत भोपनिधि द्रव्यानुपूर्वा न ४थन ५३ यतi જ, જ્ઞાયક શરીર અને ભવ્ય શરીરથી ભિન્ન એવી દ્રવ્યાનું પર્વોનું વર્ણન પણ मही समास थाय छे. (से त' नोआगमओ दवाणुपुवी-से त दव्वाणुपुब्बी) मा ४यननी સમાપ્તિ થઈ જવાથી ને આગમને આધારે જે દ્રવ્યાનુપૂર્વી બને છે તેના સ્વરૂપના નિરૂપણની પણ સમાપ્તિ થઈ જાય છે. આ પ્રકારનું આ द्रव्यानुभूतीन २१३५ ७.
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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