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________________ अनुयोगदारसे या-अथ का सा औपनिधिकी द्रव्यानुपूर्वी १ औपनिधिकी द्रन्यानी त्रिविधा प्रज्ञप्ता, तद्यथा-पूर्वानुपूर्वीर, पश्चानुपूर्वी २, अनानुपूर्वी ३२ ० ९७।। टीका-'से कि तं' इत्यादि अथ का सा औपनिधिकी द्रव्यानुपूर्वी ? इति शिष्य प्रश्नः। उत्तरमाहभोपनिधिकी-उपनिधिः स्थापनं निर्माणमित्यर्थः, स प्रयोजनमस्या सा, द्रव्यानुपूर्वी-द्रव्यविषयाऽऽनुपूर्वी त्रिपकारा प्रोक्ता। तद्यथा-पूर्वानुपूर्वी विवक्षितधर्मास्तिकायादिद्रव्यविशेषसमुदाये यः पूर्वः प्रथमस्तस्मादारभ्य या आनुपूर्वी - अनुक्रमः परिपाटो वा निक्षिप्यते सा पूर्शनुपूर्वी ? । पश्चानुपूर्वी-तत्रैव द्रव्यविशेष. “से किं तं ओवणिहिया" इत्यादि शब्दार्थ-से किं तं ओवणिहिया दवाणुपुटवी ) हे भान्त ! औपनिधि द्रव्यानुपूर्वी का क्या स्वरूप है ? उत्तर- (ओवणिहिया वाणुपुब्बी तिचिहा पणत्ता ) औपनिधि द्रव्यानुपूर्वी तीन प्रकार की कही गई है । (तंजहा) वे उसके ३ प्रकार ये है-(पुम्वाणुपु०वी १, पच्छाणुपुवी२, अणाणुपुव्वी ३ य) १ पूर्वानुपूर्वी २ पश्चानुपूर्वी और ३,अनानुपूर्वी उपनिधि का अर्थ स्थापन या निर्माण है। यह जिसका प्रयोजन हो उसका नाम औपनिधिकी है । यह द्रव्य वियषक औपनिधिकी द्रव्पानुपूर्वी-पूर्वोक्तरूप से३तीन प्रकार की हैं। विवक्षित धर्मास्तिकाय आदि द्रव्य विशेष के समुदाय में जो पूर्व प्रथम द्रव्य है उससे लेकर जो आनुपूर्वी - अनुक्रम-परिपाटी निक्षिप्त की “से कि त ओवणिहिया" त्याह सहाय-( से कि त ओवणिहिया व्वाणुपुब्बी ) 3 भावन! मी५ નિષિકી દ્રવ્યાનુપૂવીનું સ્વરૂપ કેવું છે? उत्तर-(ओवणिहिया दव्वाणुपुव्वी तिविहा पण्णत्ता) मोपनिधिही न्या. नुपी १५ २नी ही छे. (तंजहा) ते त्रय प्रा। नीचे प्रमाणे - (पुत्वाणुपुषी, पच्छाणुपुव्वी, अणाणुपुगी य) (१) पूर्वानुभूती, (२) ५श्वानु. पूवी, भने (3) मनानुभूती ઉપનિધિ એટલે સ્થાપના અથવા નિર્માણ તે સ્થાપના અથવા નિર્માણ જેન પ્રોજન હોય છે તેને ઔપનિધિ કી કહે છે. આ દ્રવ્યવિષયક ઔપનિષિકીના ઉપર મુજબ ત્રણ પ્રકાર છે. વિવણિત ધર્માસ્તિકાય આદિ દ્રવ્યવિશેષના સમુદાયમાં જે પૂર્વ (પ્રથમ દ્રવ્ય) છે ત્યાંથી શરૂ કરીને જે આનુ પૂર્વ (અનુક્રમ, પરિપાટી) નિશ્ચિત કરવામાં આવે છે-રાખવામાં આવે છે
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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