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________________ २८६ अनुयोगद्वारसत्रे अथानुपूर्यादीनां स्वरूपं निरूपयितुमाह, मूलम्-से किं तं आणुपुव्वी१, आणुपुत्वी दसविहा, पण्णत्ता, तंजहानामाणुपुत्वी१, ठवणाणुपुव्वीर, दव्वाणुपुव्वी३, खेत्ताणुपुत्वी४, कालाणुपुवी५, उकित्तणाणुपुत्वी६, गणणाणुपुत्वी७, संठाणाणुपुव्वीट, सामायारीआणुपुव्वी९, भावाणुपुनी१० ॥सू०७२॥ छाया-अथ काऽसौ आनुपूर्वी ? आनुपूर्वी दशविधा प्रज्ञप्ता, तद्यथानामानुपूर्वी १, स्थापनानुपूर्वी२, द्रव्यानुपूवीं ३, क्षेत्रानुपूर्वी ४, कालानुपूर्वी५, उत्कीर्तनानुपूर्वी ६, गणनानुपूर्वी ७, संस्थानानुपूर्वी ८, सामाचार्यानुपूर्वी९, भावानुपूर्वी १० ॥मू० ७२॥ टीका-शिष्यः पृच्छति-से कि तं' इत्यादि । अथ कोऽसौ आनुपूर्वी १ इति । उत्तरमाह-आनुपूर्वी-इह हि पूर्व प्रथमम् आदिः इति पर्यायाः। पूर्वस्य-अनु अब सूत्रकार आनुपूर्वी आदि को के स्वरूप का कथन प्रारंभ करते हैं:दस में सब से प्रथम वे आनुपूर्वी कितने प्रकार की है यह स्पष्ट करते हैं "से कि तं' इत्यादि । ॥सत्र ७२॥ शब्दार्थ--(से किं तं आणुपुव्वी) हे भदन्त ! पूर्व प्रक्रान्त आनुपूर्वी क्या है-(आणुपुवी दसविहा पण्णत्ता) उत्तर--आनुपूर्वी दस प्रकार की कही गई है। (तं जहा) जो इस प्रकार से है-(णामाणुपुव्वी) एक नामानुपूर्वी (ठवणाणुपुव्वी) दुसरी स्थापानानुपूर्वी (दवाणुपुव्वी) तीसरी द्रव्यानुपूर्वी (खेत्ताणुपुब्वी) चौथी क्षेत्रानुपूर्वी (कालाणुपुव्वी) पांचवी कालानुपूर्वी (उक्कित्तणाणुपुव्वी) छठी उत्कीर्तनानुपुर्वी (गणणाणुपुथ्वी) सातवीं गणनानुपूर्वी (संठाणाणुपुच्ची) आठवी-संस्थानानुपूर्वी (सामायारीमा०) नववीं समाचार्यानुपूर्वी (भावाणुपुव्वी) और दशमी भावानुपूर्वी। पूर्व, प्रथम और आदि ये सब पर्याय હવે સૂત્રકાર આનુપૂર્વી આદિકના સ્વરૂપનું નિરૂપણ કરવાને પ્રારંભ કરે છે. તેમાં સૌથી પહેલાં તે એ વાત પ્રકટ કરે છે કે આનુપૂર્વી કેટલા પ્રકારની છે? "से कि त आणुपुव्वी" त्या शाय-(से किं तं आणुपुवी) शिव्य शु३ने थे। प्रश्न पछे छे . હે ભગવન ! પૂર્વપ્રકાન્ત (પૂર્વ પ્રસ્તુત) આનુપૂવીનું સ્વરૂપ કેવું છે? उत्तर-आणुपुन्वी दसविहा पणत्ता-तंजहा) मानुषी नानीय प्रभारी श પ્રકાર કહા છે (णामाणुपुथ्वी (१) नाभानुभूती, (ठवणाणुपुव्वी) (२) २थापनानुषी, (दव्वाणुपुदी) (3) द्रव्यानुषी, (खेत्ताणुपुन्धी) (४) Augी', (कालाणुपुवी (५)
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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