________________ 80 * मोर वहां से मनोहर और स्फटिक के समान सरोवर को देख कर प्राश्चर्य चकित हो गये / सरोवर की पाल से प्रागे जाते हए एक धोबी को भव्य वस्त्र धोते हुए देखा। उसमें एक छोटी साड़ी को देखकर बुद्धिशाली श्रीचन्द्र ने कहा कि, ' हे गुणचन्द्र ! नुमने यहां कोई कोतुक देखा है / गुणचन्द्र ने पूछा कि 'यहां क्या आश्चर्य है ?" श्रीचन्द्र ने कहा कि, 'हे मित्र ! यह श्रेष्ठ साड़ी किसी पद्मिनी की जान पड़ती है। इस श्रेष्ठी साड़ी की गंध से उस तरफ भंवरों की श्रेणी भ्रमण कर रही है। पद्मिनी का शरीर प्रस्वेद पुष्पों की सुगंध से भी अधिक सुगन्धित होता है / पमिनी पद्म के गंध वाली होती है / हस्तिनी स्त्री मधु के गंध वाली होती है। चित्रिणी विचित्र सुगन्ध वाली तथा शखिनी मत्स्य के गंध वाली होती है।" आश्चयं पाकर गुणचन्द्र ने धोबी से पूछा कि, हे मित्र ! यह कौनसा स्थान है। यह भव्य वस्त्र किसके हैं ?" धोवी ने कहा कि "हे सद्बुद्धि ! तुम परदेशी जान पड़ते हो सुनो! यह दीपशिखा नगरी है / दीपचन्द्र राजा का मैं नल नामक धोबी हूं। यह पद्म सरोवर है। ये वस्त्र प्रदीपवती रानी के और राजा के भाई की पुत्री और उसकी पुत्री की साड़ियां हैं। गुणचन्द्र ने फिर से पूछा कि, "राजा के भाई की पुत्री कौन है ?" धोबी ने कहा कि, 'भाई की पुत्री चन्द्रवती है। वह शुभगांग P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust