________________ यह कैसा शोक बरसाया है। ... परन्तु इसमें तुम्हारा क्या दोष है ? पूर्व भव में मेरे द्वारा कोई महापाप आचरण हुआ होगा जिसके दुखद परिणाम स्वरुप दुष्कर ऐसा बनाव बना है। पूर्व में की हुई हिंसा व दुष्कर्म उदय में आने से मुझे यह फल मिला / अभी मुझे जो दुःख है उसे केवली ही जान सकते हैं।" सूर्यवती के रुदन से सारी सखियां रुदन करने लगी जिससे सब जगह शोक का साम्राज्य फैल गया / स्नेह से क्यां नहीं होता? "हे वत्स ! जगत में चन्द्र समान, हे 'श्रीचन्द ! हे चन्द्र के समान निर्मल प्रगट होकर मुझे दर्शन दे। अपनी मां की सांत्वना के लिए एक बार तो बोल ! तू कहां गया है ? यह विलाप सुनकर 'राजकुल में यह क्या हुआ ?' ऐसा महान् कोलाहल उत्पन्न हो गया स्वजनों ने आकर दुःख का कारण और गर्भ का वह सर्व वृतांत जाना। उस समय स्वजन समझाने लगे कि 'हे महाराणी ! अब क्या हो सकता है ? भवितव्या टाली नहीं जा सकती। विधि के अशक्य परिहारको निवारण नहीं किा जा सकता। आपतो तत्व ज्ञान की ज्ञाता हैं। क्या श्री जिन आगम को नहीं जानती हैं ?" "प्रति शोक और विलाप का प्रब त्याग करो। बीते हुए का P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust