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________________ . * 361 कूल तोड़ कर शय्या के लिए दे जाती है और प्रभात में त्यागे हुए फूरत ले जाती है। ' हमेशा की तरह आज प्रभात में वह मालन शंका रहित श्रीचन्द्र कुमार को उन पुष्पों में गृह उद्यान में लेजा कर इकठ्ठ किये हुए पुष्पों के पुंज में गुप्त रूप से रख देगी। जब संकट टल जायेगा। तव उसे वापिस ले पायेंगे / "देखते हैं अब क्या होता है ?" सूर्यवती ने अति हर्षित होते हुए कहा कि, "हे बुद्धिशालिनी ! सर्व शुभ है। तेरी बुद्धि तो पंडितों से भी बढ़ कर हैं।" रात बीत गई। श्री 'श्रीचन्द' के रूप का दर्शन करने के लिए उदयाचल पर्वत पर धीरे 2 सूर्य प्राया। विकसित मुख कमल वाले श्रीचन्द्र को सखियों ने गोद में लेकर बार 2 चुम्बन करके, तिलक नेत्रांजन आदि करके, मस्तक पर मुकुट रखा। सखियों में से किसी की भी श्रीचन्द्र को छोड़ने की इच्छा नहीं होती थी। श्री 'श्रीचन्द्र' को सूर्यवती गोद में लेकर बारबार चुम्बन करके, दृढ़ स्नेह से, बहुत स्तनपान करा कहने लगी कि, "हे पुत्र! वहांत अकेला कैसे रहेगा? गिरि गुफा में केसरीसिंह के बालक का कौन रक्षक होता है ? हे वत्स ! तू अपने मुख कमल के दर्शन मुझे जल्दी करवाना / इतने में हमेशा की तरह मालन प्रभाव में आयी। निश्चिन un Aaradhak Trust P.P. Ac. Gunratna
SR No.036499
Book TitleVardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSiddharshi Gani
PublisherVishva Shanti Prakashan
Publication Year
Total Pages265
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size136 MB
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