________________ स्त्रीचरित्र होली. _भारतमें मची है होरी। ...इक और भाग अभाग एक दिशि होय रही झकझोरी / अपनी अपनी जय सब चाहत होंड पडी दुहुँ ओरी / इन्द सखि बहुत बटोरी ॥१॥धूर उडत सोड अबिर उडावत सबको नयन भरोरी। दीन दशा - असुवन पिचकारिन सब खिलार भिज यो री / भीजि रहे भूमिलटोरी // 2 // भइ पतझार तत्व कहुँ नाहीं सोइ वसन्त प्रगटोरी। पीरे मुखभड प्रजादीन व्है सोइ फूली सरसोरी / शिशिरको अन्त भयोरी // 3 // बौराने सब लोग न सूझत आम सोई वौरयोरी / कुहू कहत कोयल ताहीत महा अँधेर छयोरी / रूप नहि काहू ल M.P.P.AC.Guirathasuri vios.