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________________ - 16 स्त्रीचरित्र. मू०-मा रोदीयस्य जननी गौतमी पति देवता // यथाऽहंमृतवत्साों रोदिम्यश्रुमुखी मुहुः // 37 // यैः कोपितंब्रह्मकुलं राज न्यै रकृतात्मभिः॥तत्कुलं प्रदर्हत्यारों सानुवन्ध शुचार्पितम् ॥३८॥धयं न्याय्यं सकरुणं नियंलीकं सनं महत् ॥राजा धर्मसुतो राज्याः प्रत्यनंदहचो हिजाः॥ ३९॥नकुलः सहदेवश्च युयुधानो धनंजयः ॥भगवा न्देवकीपुत्रो ये चान्ये याश्च योषितः॥४०॥ - अर्थ-हाय! जैसे मैं अपने मरे हुये बालकोंके दुःखसे दुःखित होकर वारंवार मुखपर अश्रुधारा वहातीहुई रुदन करती हूं तैसे अश्वत्थामाको माता (गौतमाकी पुत्री) पतिव्रतापी रुदन न करै // 37 // इन्द्रियोंको वशमें न रखनेवाले जिन क्षत्रियोंने ब्राह्मणकुलको कुपित किया, तो शोकसे दुःख पानेवाला वह ब्राह्मणकुल, तिन P.P.AC.Gunrathasuri M.S., Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036493
Book TitleStree Charitra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1904
Total Pages236
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size175 MB
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