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________________ भाषाटीकासहित. 185 औरंगजेब बादशाहने राजकुमारीके साथ विवाह करनेकी इच्छासे उसको दिल्ली ले आनेके लिये चुनेहुये दो हजार सवार रूपनगरको भेजे और आज्ञा दी कि राजकुमारीको जल्द दिल्ली ले आओ, यह समाचार पाय राजकुमारीने मुसलमान बादशाहके साथ सम्बन्ध करनेसे घृणा करके राजा राजसिंहको एक पत्र लिख | भेजा कि आप यदि मुझको इस दुष्ट म्लेक्षसे बचा / सके तो बहुत अछी बातहै, मुझ राजहंसिनीको वगुलेकी स्त्री होना स्वीकार नहीं है, आप राजहंस हो आपको | यही योग्य है कि मुझको अपनी वना ओ, और क्षत्रि-:.. | यधर्मका परिपालन करो यदि शीघ्र आकर मेरेको इस | दुष्टसे नहीं छडावेंगे तो मैं अपना प्राण शीघ्र त्याग | दूगी. इस प्रकारका पत्र पातेही राजसिंहजी अपने चुने Jहुये सवारोंको साथ ले अवली गिरिके नीचे नीचे अचानक रूपनगरमें पहुंचगये, और बादशाहकी फौजको मारकर भगादिया, और राजकुमारीका डोला साथ लेकर अपने राजको लौट आये, तात्पर्य यह कि स्त्रियों P.P. Ac. Gunratnasuri MS Jun Gun Aaradhak Tru
SR No.036493
Book TitleStree Charitra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1904
Total Pages236
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size175 MB
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