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________________ 160 - स्त्रीचरित्रल राजकी लडकीके साथ विवाह करनेका संदेशा भेजा तो चन्देलराजाने कह ला भेजा कि यदि गोंड"राजा हमारी राजकुमारीके साथ चलने के निमित्त पचास सहस्र सेना जो आसकै तो मह उसको अ. पनी कन्या देना अंगीकार करेंगे यह सुनकर गोडराजाने सहजमें इतनी सेना इकट्ठी कर अपने साथ ली. और चन्दलराजकी कन्याको विवाह लिया यह गढ जबलपुरसे पांच मील दक्षिण दिशामें नर्बदासे दक्षिण तट पर बसा हुआ है, जो अंग्रेज बंबई होकर विलायत जाते हैं, वे इसी स्थानपर नर्वदा पार होते हैं, यहां पांच सीढीका सुन्दर घाट पत्थरका बना हुवा है, जिसमें थोडी थोडी दूर पर छोटे छोटे मन्दिर बने हुये हैं, तीन सौ वर्षके लगभग हुये कि गढमंडल का राज्य सौ मील चौडाई और तीन सौ मील लम्बाइम था, देशमें सब प्रकारका सुख वर्तमान था, इस राज्यम सत्तर हजार ऐसे गांव और नखर थे, जो किसी समयम परदेशियोंके आधीन नहीं हुये, तिस पीछे जब मरहला Jun-Gun Aaradhak Trust P.P.AC..Gunratnasuri M.S.
SR No.036493
Book TitleStree Charitra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1904
Total Pages236
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size175 MB
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