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________________ स्त्रीचरित्ररानी--तो मैं सन्धि करके उसका मार्ग कभी निष्कण्टक करनेवाली नहीं हा म्लोक्ष यवनके साथ सन्धि ? लुटेरू चोरोंके साथ सन्धि नारी जातिको मर्यादा नाश करनेवाले असुरोंके साथ सन्धि इस प्राणके रहते यह बात कभी न होगी, मंत्री, प्रथम तो ..! समस्त वीर पुरुषोंके पास निमंत्रण भेजदो, फिर दूतको लेकर शीघ्र आजओ मैं उससे बात कर लूंगी. - मंत्री॰—जो आज्ञा, आपकी आज्ञाके अनुसार काम करके शोध आता हूं, यह कह मंत्रीने रानीकी आज्ञाके अनुसार राज्यके वीर पुरुषोंको निमंत्रण भेजा और दूतको साथ लेकर आये. -- रानी-(एलचीकी और देखकर) तुमारे सेनापतिने है, कि शिकस्तोपर जुल्म किया जाय, जब कि दाहर - राजा मारे गये और आपके फर्जन्द भाग गये, ता P.P. Ac. Gunratnasuri M. Jun Gur;Aaradhak Tru
SR No.036493
Book TitleStree Charitra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1904
Total Pages236
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size175 MB
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