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________________ स्त्रीचरित्र. आते थे और दूसरे दिन पक्की वहीपर चढालेते थे. और ऐसी सावधानीसे रहा करतेथे कि मोहनीको किसी समय अवसर नहीं मिलताथा, केवळ चिट्ठी पत्रीसे. मोहनीका दिल बहलाव रहताथा. और परस्पर एक दूसरेके प्रेममें चकनाचूर रहते थे. लालाहजारीलालको गुलजारी लालका सब तरहसे निश्चय था. और मनसे बहुत चाहते थे जैसा कपडा आप पहिनते थे वैसाही गुलजारी लालको बनालेनकी आज्ञा देदेते थे. जब लालाहजारी लालको दिसावर अर्थात दिल्ली जानकी आवश्यकता दुई तो एकदिन पहले मोहनीसे कहा कि प्यारी ! हम कल दिल्लीको जानेवाले हैं तुम घरमें अकेली होक्या प्रबन्ध कर जाये. यह बात सुनकर मोहनी अपने मनमें तो बहुत प्रसन्न हुई. परन्तु ऊपरसे मुख मुरझाय उदास होकर बोली, कि आपके बिना देखे तो मेरा चित्त व्याकुल रहा करेगा, परन्तु बिना आपके गये बनताभी नहीं आपको बाहर कितने दिन लोंगे. हजारीलालने जबाब दिया, कि दो दिन लगेंगे तीसरे दिन घरपर आ -TB Unrathasur M.S un Aaradhak THUSE
SR No.036492
Book TitleStree Charitra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1920
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size158 MB
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