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________________ भाषाटीकासहित. .. 31 साथ व्याही जाचुकी हो. सो अब तो हमको परमेश्वरने अंग्रेजबहादुरकी प्रजा बनाया है कि जो किसी समयभी अन्याय नहीं करना चाहता. फिर अब छोटी अवस्थामें लडका लडकीका विवाह क्यों कियाजाय ? हम तो अब अपनी लडकी लक्ष्मीका विवाह बारह वर्षकी होजाने उपरान्त करेंगे, तबतक उसका सारस्वत अर्थसहित पढकर समाप्त होजायगा यह सुनकर मेरी माता चुप होरही. जब मैं बारह वर्षकी हुई तब पिताजी ने मेरेलिये वर खोजना प्रारंभ किया. कान्यकुब्ज महत्कुलीनोंमें छोटे छोटे बालकोंका विवाह होजाता है, इसकारण वर मिलताथा तो घर नहीं, और घर मिलताथा तो वर ठीक नहीं मिलताथा, दूसरे मेरे सातवें स्थानमें मंगल था. मंगली होनेसे वरका मिलना दुर्लभ होगया. तबतक मैं तेरहवर्षकी होगई. मेरे मातापिताको रातदिन वरकी चिन्ता हुई. चौदहवीं वर्ष मुझको चौथी बृहस्पति थी. पंरतु मेरेलिये बड़ी कठिनाईसे ग्यारह वर्षका एक वर मिला. पन्हवर्ष की अवस्थामें बारहवर्ष P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036492
Book TitleStree Charitra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1920
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size158 MB
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