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________________ 5 लोग राजाकी निन्दा और कितनेक जन कन्याकी निन्दा करते हैं तथा कितनेक समझदार || अपने भाग्यको निन्दा करते हैं; अखीर तीसरे दिन पिछली रातको इस प्रकार देववाणी हुई: (श्लोक) नास्ति दोषोऽत्र कन्याया। नरेन्द्रस्याऽपि नास्ति च // कपाटौ मुद्रितौ येन / कारणं तन्निशम्यताम् // 1 // ____ भावार्थः-अहो नगरनिवासियों! यहां पर राजकन्याका कोई दोष नहीं, इसही तरह रा|| जाका भी नहीं है; ये दोनो किंवाड़ किस लिये बंद हो गये उसका कारण सुनो-यह देववाणी सुनकर राजा, कन्या और प्रजाके सब लोग हर्षित हुवे और सोचने लगे कि क्या कारण बयान | करेगी ? इतने में पुनः देववाणी हुई: (श्लोक) दृष्टेऽपि यस्मिन् , जिनमन्दिरस्य / कपाटद्वंद्वं हि समुद्घटेच्च // . ' स एव भर्ता नृपकन्यकाया / जानीत लोकाः किल देववाण्या // 2 // Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradha
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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