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________________ ARRRractors ARS 6 मगर नवपद महाराजके और शस्त्रनिवारणी औषधीके प्रभावसे शरीर सहीसलामत रहा; तद| नन्तर श्रीपाल कुमार बोले-तुम लोगोंका बल तो मैनें अच्छीतरह देखा, अब दो दो हाथ मेरे / भी होने दो, ऐसा कह कर कुंवरने बलपूर्वक बाणोंद्वारा महाकालकी सेनाको ताड़ित कीसेनाके कितनेक लोग पृथ्वीपटल पर लौटने लगे, कितनेक पर लोक सिधा गये और कितनेक श्याममुख होकर भग गये; इस तरह सब फोज़ दशों-दिशाओंमें पलायन हो गई, इस विषमाsवस्थाको देख महाकाल कोपाटोप होकर स्वयं युद्ध करनेको आया मगर श्रीपाल कुमारने एकदम फाल मारकर महाकाल जूपालको बंधनसे बांध दिया और अपने स्थान पर लेआया; है इस हालतको देख कर जहाजोंमें रहे हुवे राजाके सुभट चारों ओर भग गये-इस वख्त श्रीपाल र कुमारने धवल के बंधन दूर किये बस शीघही " कमज़ोर और गुस्सा भारी की तरह " धवलसेठ हाथमें खड्ड लेकर महाकालको मारने दौड़ा, तब नीतिवान् कुंवर कहने लगे-अहो सेठ! घर पर प्राप्त हुवे मनुष्यको मारना युक्त नहीं-नीति शास्त्रका फरमान है: Ac.Gunratnasuri M.S.. Jun Gun Aaradhak
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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