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________________ HIS प्रस्ताव दसरा. श्रीपाल | मिटादेनेमें समर्थ एक कुशल वैद्य रहता है, वहांपर तुम जाओ; ऐसा सुनकर वह रानी अपने ||5|| I पुत्र रत्नकी संभाल उन लोगोंको देकर शीघही कौशम्बी नगरीको गई, वहांपर पृच्छा करनेसे || मालुम हुवा कि वैद्य तो जियारत (यात्रा) करनेको गया है, कितनेक दिनों तक वहींपर ठहर है। | कर उसकी राह देखती रही, एक दिन एक समर्थ मुनिराजसे अपने प्यारे पुत्रके शुभ समा चार (जो ऊपर पुत्रको कहे हैं वे पुनः यहांपर कहे ) सुनकर वह रानी यहाँपर अपने पुत्रसे है। | मिली-हे सम्बद्धिनी! वह कमलप्रभा रानी खुद मैं ही हूँ और वह श्रीपाल कुमार यही मेरा पुत्र है जो कि तेरी पुत्रीका नाथ है. ANTISIPASAstong CHECKCE // 26 // / अपने सहोदर भाई पुण्यपालके आगे श्रीपाल और मयणासुन्दरीके सब हाल कह सुनाये; तब | पुण्यपाल अत्याग्रहकर श्रीपाल कुमारको सकुटुम्ब अपने घर ले गया, रहने के लिये धन-धान्य EMAC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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