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________________ नाणेका खज़ाना) हाथी, घोड़े, दास, दासिये, नगर, प्रामादि अरिदमन कुमारको दिये-इस | तरह करनेपर प्रजापाल भूपालकी जगतमें महती कीर्ति हुई. कितनेक दिनोंके पश्चात् अरिदमन कुमारने राजाके पाससे शीख लेकर अपने नगरकी है। तर्फ प्रस्थान किया, सुरसुन्दरीभी अपने मात-पिताओंको प्रणामकर, उनकी आज्ञा लेकर तथा उनकी दीहुई हित शिक्षा ग्रहण कर रवाना हुई-अरिदमन कुमार अपने परिवार सहित सातसो कोषकी मार्ग यात्रा सम्पूर्णकर शंखपुरी नगरी के समीप उद्यानमें पहुँचा; बहुतसे सेना वगे राके लोग अपना नगर समीप जानकर कौटम्बिकोंको मिलनेके उत्साहसे कुमारकी आज्ञा ले|| कर नगरमें चले गये, यहांपर अरिदमन कुमार सुरसुन्दरी के साथ थोड़े परिवारसे उस उ| द्यानमें ठहरा हुवा है. * हिन्दी भाषाके श्रीपाल चरित्रका पहिला प्रस्ताव सम्पूर्ण हुवा. * ॐAGEAAWARA P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradh
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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