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________________ + GEETA BRECEN-LAASHUAGES / रेमें मैने अपने हाल ज्ञापित किये-दे पिताजी ! में अभागिनी हूँ, आपने तो मेरा विवाह भारी | विभूतिसे कियाथा, परन्तु मेरे नाग्यने मेरी यह दशा की, किसे दोष दिया जाय-नीतिकारोंका कथन है: (श्लोक) ____ भाग्यं फलति सर्वत्र / न च विद्या न पौरुषं // समुद्रमथनालेभे / हरिर्लक्ष्मी हरो विषम् // 1 // जावार्थः-सब जगह भाग्य फलता है, मगर विद्या और पुरुषार्थ फलता नहीं है; एकही है तरह समुद्रके मथन करनेसे श्रीकृष्णने लदमी और शंकरने जहर प्राप्त किया; गरज़ कि भाग्य. हीके सब खेल हैं. . मैरी नगिनी मयणा सुन्दरी धन्या-कृत पुण्या है इसको धर्म फला, इस प्रकार सुर सुन्दरी की हकीकत जानकर श्रीपाल नरेशने अपनी अगण्य सेनामेंसे अरिदमन कुमारकी शोध करा Jun Gun Aaradhak C AD. Gunratnasuri M.S.
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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