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________________ ... कमलप्रभा माताने मदनाको कहा-हे वत्से ! अन्य किसी राजाने सारी नगरीको घेर || है रख्वी है, लोग सब चलाचल हो रहे हैं, प्रनु जाने क्या 2 बनाव बनेगा.? अरे! मेरा पुत्र तो पर. 6|| देश गया है, आज़ बारह महिने होगये उसका कोई संदेश भी नहीं है, अपने दोनो की क्या दशा होगी? तब मदना बोली-हे मात! नवपद महाराजके प्रतापसे अपनेको कोइ तरह भय || नहीं है, चित्तमें कुछ भी खेद मत करो; फिर बोली-आज़ शायंकालको घर-देरासरमें जिन|| प्रजुकी मैं आरती कर रही थी उस वख्त मुझे अपूर्व दर्शन हुवे, इससे इतना हर्ष हुवा कि || P मेरी समस्त रोम-राजि विकखर हो रही है, इस वख्त मेरा डावा नेत्र व अंग फरक रहा है, || इससे मालुम होता है कि आज ही और इस ही वख्त आपके पुत्र मिलना चाहिये; यह सुनकर 5 कमलप्रभाने कहा-हे वत्से! तेरी जबानमें अमृत वसो-बस इस तरह श्रीपालजी माताके || चिन्तातुर वचन तथा प्रियाके दृढतर वचन सुन कर एकदम बोले-हे मात ! दरवाजा खोलो! | दरवाजा खोलो!! यह हर्षप्रवर्षक वचन सुनकर माताने कहा-हे वधु! यह मेरे पुत्रका वचन Jun Gun Aaradhak Ac. Sunratnasuri M.S.
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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