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________________ HOCOLARSARASHTRA पुनर्जीवन हुवा है, सब लोग प्रसन्न होते हुवे वापिस नगरको आगये, इस वख्त राजांने महा राजाको प्रार्थना की-हे नाथ! यह बाला मैने आपको अर्पण की: इस प्रकार मोटे महोत्सवसेन है श्रीपालजीके साथ अपनी कन्याका विवाह किया, महासेनने श्रीपाल नरेन्द्रको बहुतेरा धन|| जन दिया और सेना लेकर महाराजके साथ चला; यहां पर आठ रानियें और पांच सखियोंके | साथ लीला-लहर करते हुवे महाराज श्रीपालने आगे प्रयाण किया. . . RECEKANKARRERAR GETRESCRECR . ... 8 नज्ज्य नी नगरीमें जयङ्कर जय. .. .... (माता और ललनासे मुलाकात) . .: . मुसरेका अपमान और सन्मान. ...HARRCRACIRECTOR अब हाथी, घोड़े रथ, पेदल, मणि, रत्न, कंचनादि प्रशस्त वस्तुओंका नेटना ग्रहण करते " RIAC.Gunratnasun M.S. Jun Gun Aaradhaki
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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