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________________ कर उज्जयनी नगरीकी तर्फ प्रस्थान. AAAAAAE+ (आठवां-विवाह.) PARTNERISERIES अब श्रीपालजी तीर्थ स्वरूप अपनी जननीके दर्शनके लिये तथा अपनी उपकारिणी / प्राणप्रिया मदन सुन्दरीको मिलनेके लिये उत्सुक हुवे, बस शीघ्रही सकल सेनादि लेकर प्रतिष्ठान पुरसे उज्जयनीके लिये प्रस्थान किया, बीचमें सोपार पत्तन आया वहां पर सैन्य सहित पड़ाव डाला, श्रीपाल राजाने पूछा-अहो लोगों! यहांका नृपति सेवाके लिये क्यों न आया? | 2 इतनेमें तो इस नगरका मन्त्री आन पहुँचा और नमस्कार करके अपने भूपतिके नहीं आनेका है कारण बयान करने लगा-हे महाराज! यहांका प्रजापति महासेन है, उनकी तारा नामकी Jun Gun Aaradhak Ac Gunnatasun M.S.
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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