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________________ श्रीपालचरित्र So // 67 // 3- है कि जो राधावेध सिद्ध करेगा वही मेरा भार हो सकेगा, अन्य नहीं; यह सुन कर राजाने में प्रस्ताव में शीघ्र ही राधावेध की सामग्री तैयार की; उसका वर्णन इस प्रकार है:-मण्डपमें एक महा है। || स्तम्भ खड़ा किया गया है, उसके आस-पास आठ चक्र लगाये गये हैं वे यन्त्रके योगसे सब ||2|| || फिरते हैं उसके ऊपर राधा नामकी एक काष्ट-पुत्तली लगाई गई है वह बड़े वेगसे फिरती है, || उसके नीचे एक तेलका कड़ाह रख्वा गया है उसमें उस पुत्तलिका प्रति बिम्ब पड़ता है, उस 3 प्रतिज्ञाकी तर्फ दृष्टि रखकर ऊंचे हाथसे इस प्रकार बाण तान कर मारे कि वह उस पूर्ण 8 वेगसे फिरती हुई राधा-पुत्तलीके डावी आंखकी कनीनिका ( कीकी ) को विंध डाले; बस 8 | इसहीका नाम राधा वेध है, वह काम अबतक किसीने न किया, वहांपर बहुतेरे राजा इकठे हो रहे हैं। इस प्रकार भट्टके मुखसे बात सुन कर उसे कुण्डल दे विदा किया और कुमार घर पर वापिस आगया-प्रातःकाल होतेही आकाश मार्गसे कुंवर कोल्लागपुर में जहां राधा-वेधका स्थान है वहांपर आन पहुँचे, उधर बहुतसे लोग मिले हुवे हैं, हारके प्रभावसे राधा-वेध सिद्ध किया %-3-4-5-1 // 6 // Jun Gun Aaradhak AC.Gunratnasun M.S. -9
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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