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________________ प्रस्ताव चौथा. 9854-9-964ERARAA5-% भावार्थः-देवके अन्दर जिनेश्वर देव, गुरुओंके अन्दर यथार्थ उपदेश करने वाले गुरु, || धोंमें प्रधान धर्म दया और मन्त्रोंमें परमेष्ठि मन्त्र सार है बाकी सब जगतमें विलाप तुल्य है. हैं| ___ प्रगुणा बोली- " आत्मा हि येन सफलीभवेञ्च" निश्चय जिससे आत्मा सफल होता है | | वह क्या है ? पुत्तलीकाने उत्तर दियाः (श्लोक ) आराधय त्वं सुगुरुं सुदेवं / पात्रेषु दानं कुरु सत्सु सनम् / / तीर्थेषु यात्रां च विधेहि नित्यं / आत्मा हि येन सफलीभवेच // 3 // __ भावार्थः-तुम सुदेव और सुगुरुकी आसधना करो, सुपात्रमें दान दो, सत्पुरुषोंका संग // 65 // करो, तीर्थोंकी हमेशां यात्रा करो जिससे आत्मा निश्चय सफल होता है. VIAC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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