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________________ तीसरा. . . भोपाल- ||6|| मैं तेरा काका हूँ, इत्यादि डुमके सारे परिवारने कुमारको आकुल व्याकुल कर दिया, कितनेक ||6|| प्रस्वार 6 गायिकाओं कुमार के गले लिपट गई, कितनेक गायक हाथ पर और कितनेक पेर पर: चिपट | |गये-इस स्थिति को देख राजा हृदयमें विचारने लगा-हा ! मेरा कुल कलङ्कित हुवा, इस | जमाई को शीघ्र ही मरवाडालना चाहिये, राजाने हुकुम किया अहो कोतवाल! उस निमित्ति। येको शीघ्रही बांधकर यहांयर ले आओ, उसने उसे हाजिर किया, राजाने पूछा-रे दुष्ट! || | यहतो मात्तंग (डुम-भांड ) है, निमित्तियेने कहा-हे राजन् ! यह मात्तंग नहीं किन्तु मात्तंग-18 पति अवश्य है; यह सुन अति रुष्ट होकर राजाने निमित्तिये व कुमारको मारनेकी आज्ञा करी, - यह विकट स्थिति जान मदनमंजरी शीघ्र ही अपने पिताके पास आई और निवेदन किया हे तात! आप यह विना-विचारा काम क्या करने लगे! आचारसे इनका (मेरे पतिका.) कुल उत्तम मालुम होता है; अतः आपको पूर्णतया निर्णय करना चाहिये. ' ... तब राजाने कुंवरको कहा अहो! तुम अपना कुल प्रकाशन करो? सुन कर श्रीपालजी कुछ MEGASARSANSLA RS RIAc Gunratnasun M.S. Jun Gun Aaradhali
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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