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________________ De8299000009999999999990 पुण्यालय चरित्रं 152 // सान्वय भाषान्तर 152 / अर्थ:-राजगादीना भक्तोमा पण कोइक सर्पसरखो दुर्गुणवाळो पण होय, एम (ते हाथीना संबंधा) विचारतो एवो ते धनावह शेठ सैन्यसमूह तैयार थयाबाद (त्यांथी) चालवा लाग्यो. // 125 / / 8. आधोरणाग्रणीस्तस्य वारणाधिपतेस्तदा। प्राञ्जलिर्जगतीजानि विजयाय व्यजिज्ञपत् // 126 // _ अन्वयः-तदा तस्य वारणाधिपतेः आधोरणाग्रणीः प्रांजलिः जगतीजानि विजयाय व्यजिज्ञपत् . // 126 // र अर्थ:-ते वखते ले हस्तिराजना मुख्य मावते हाथ जोडीने ते पुण्यात्यराजाने जयप्रयाण करवामाटे विनंति करी के, // 126 // जयत्येव रणोत्सङ्गसंगतोऽसाविभो विभो / अस्मिन्नारुह्यतामाशु मुह्यतां माऽसुहृद्गणैः // 127 // . __ अन्वयः-(हे ) विभो ! रणोत्संगसंगतः असौ इभः जयत्येव, अस्मिन् आशु आरुह्यता ? असुहृद्गणैः मा मुह्यतां 1 // 127 // अर्थ:-हे स्वामी ! रणसंग्राममा चडेलो आ हाथी जय मेळवधानोज छे, माटे (तमो) आ हाथीपर तुरत चहो ? अने शत्रुओना समूहथी डरो नही.॥ 127 // :. . DISIODOS 0000222882200220peleo
SR No.036475
Book TitlePunyadhya Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1928
Total Pages229
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size64 MB
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