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________________ पोस गकल्याणाय दंगकः // 50 // वंशलक्षणविज्ञान-दक्षिणो मुनिपुंगवः // एवं प्रोवाच वाचालः / सद्यः संमोदयन्मनः // 55 // एकपर्वा प्रशस्या स्याद् / हिपर्वा कलहप्रदा / वंशयष्टिर्नवे* चरित्र खातु-स्त्रिपर्वा लाजहेतवे // 55 // मारणांता चतुःपर्वा / मार्गे कलहहारिणी // पंचपर्वा 36 जवेयष्टिः / षट्पर्वातंकदायिनी // 55 // सप्तपर्वारोग्यकरी / पृथुला चतुरंगुला // अष्टांगुलो / विता सत-पर्वा मत्तेनवारिणी // 53 // अष्टपर्वा नवेद्यष्टिः / सुसंपत्तिविधायिनी // नवप यशोहेतुर्दशपर्वा तु संपदे // 54 // वहुवर्णा सुशुषिरा / दग्धा वक्रा सकीटका // ऊँs+शुष्का जवेयष्टि-वर्जनीया प्रयत्नतः // 55 // एकवर्णा महानिग्धा / पंचवर्णविनूषिता / इत्यादिखदणा 'ज्ञेया। प्रशस्या वंशयष्टिका // 56 // अंगुख्या दर्शयित्वैकं / दंगकं प्रमदप्रदं // अयमेतेषु सारोऽस्ति / नंदत्रेष्विव चंद्रमाः॥५७ // नाग्यसौजाग्यसंपन्न / एतद्देमं ग्रहीध्यति // विना जाग्येन केनापि / चिंतारत्नं न खन्यते // 57 // गृहीतुः सप्तमे घस्ने / मह द्राज्यं नविष्यति // एषा राज्यकरी यष्टि-वर्धिता चतुरंगुलं // एए // तदा वैविद्यते योगः / || स पुनः सांप्रतं न हि // कार्य कुर्युः समस्तं हि / संयोगे सति नान्यथा // 60 // नैकं बी-|| P.P.AC. Gunratnasuri Ms.. . Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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