________________ HERE ज र्गाद्यै–यों बिनेति न साहसी // ए७ // तस्मै योग्य जति ज्ञात्वा / चिंतामणिसम गुरुः // // ददातु चारुचारित्रं / समीहितकरं करात् // ए७ // तपोनिहुनिः पुष्पैः। पावनै वनादिनिः॥ आराध्य साधितं सत्त-कुर्यात्सर्वं समीहितं // एए // स्यात्तस्याजितसेनवनिरुपम वैमानिकं चैहिकं / कालादल्पतरात्सुखं शिवपुरे प्राप्तिश्च निर्बाधने // यो धत्ते परमादरेण म. | तिमांश्चारित्रचिंतामार्ण / त्यक्त्वा मोहवशंवदत्वमिति तं पद्मावति त्वं जज // 30 // दुःख| मिश्रितसंसार-सुखं नैवानिकांदयते // विषसंसक्तमामोद-मोदकायं किमद्यते // 1 // | रघट्टघटीतुल्यो / जीवो ब्राम्यन् जवावटे लक्ष्मीसुखादिपानीयैः / क्षणं रिक्तः कणं नृतः // // पुण्यक्ष्यकरी संप-त्सतां नो हर्षदेतवे // पापक्षयकरी चाप-निंद्यते न विचक्षणैः // 3 // इंद्रजालमिवालीक-संसारं त्यज दुस्त्यजं // निर्व्याजं जज चारित्र-मिंडादेरपि 5बनं // 4 // एवं महत्तरासौम्य-प्रशस्यास्यसुधाकरात् // साप्रीयत चकोरीव / तां पीत्वा देशनासुधा / / वैराग्यरंगमापन्ना / व्यापन्नाशनदक्षिणां // अवैलक्ष्यामसौ दीक्षा-मयाचिष्ट महत्तरां // P.P.AC. Gunratnasuri M.S.. * Jun Gun Aaradhak Trust