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________________ प्रत्येक सिंह-जीवौ हंसवदीयतुः // ए६ // अथो समुपदत्ता सा / प्रासूत सुतयामलं // पुत्रजन्मो त्सवं हर्षा-छासुदेवो ह्यचीकरत् // ए७ // दत्ते खप्नानुसारेण / पुत्रयोरनिघे इति // बायः चरित्रं सागरदेवोऽनू-दन्यः सागरदत्तकः // ए // लालितौ पंचधात्रीनि-द्धिमासादितौ क्रमा२६ || त् // विदधानी कलान्यासं / जग्मतुरूवनं वयः // ए // अन्यदा रामसेनेन / पुत्राच्यां च समं सन्नां // अलंकृत्य स्थितोऽजादी-ज्ज्योतिः स हरिरंबरे // 6 // // किमेतदिति लोकेन / चिंत्यते. यावदंतरा // तावहिमानमायासी-देकं तत्र सलांतरे // 1 // ततो एको विनिगत्य / विद्याधरवरो हरिं // ननाम तदनुज्ञात-स्तत्पुरस्ताऽपाविशत् // 5 // ऊचे चतुरमत्याख्यो / देवदिन्नेन देव ते // अंतेऽस्मि प्रेषितो मंत्री / विज्ञप्तं चेति वर्तते // 3 // अस्ति जानुमती कन्या / मनोज्ञांगी ममोत्तमा // जयंतीमपि रूपेण / जयंती मृगलोचना // 4 // अनेकागतगंधर्व-मुखात् श्रुतगुणोत्करं // पुत्रं सागरदत्तं ते। वरत्वेनावृणोद् हृदि // 5 // विद्याधरकुमारेज्यो। दीयमानापि सा न हि // अमन्यतैकमेवैनं। ध्यायत्यर्कमिवाब्जिनी // 6 // विज्ञाय तदभिप्राय / मयायं प्रहितः प्रतो // त्वदंते वर्तते मंत्री / पुत्रीवांबितपूर्तये // 7 // P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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