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________________ चरित्रं जो निजं दृष्ट्वा हरिः दणात् // सिझविद्याधरीः स्मृत्वा / सूर्यास्त्र प्रकटं व्यधात् // 63 // तस्मि. न् स्फुरति तत्सैन्य-प्रमीला तमसा समं // अनश्यत्तत्पुनश्चित्रं / पद्मः संकोचमाप यत् // 6 // क्रूराकारं सफूत्कारं। पन्नगास्त्रमथामुचत् // गरुमास्त्रेण सद्योऽपि / हरिः सर्पाननाशयत् श्याए // 65 // करालप्रज्ज्वलज्ज्वाला-वह्निशस्त्रं ततोऽतिपत् // हर्या विकृतमेघेन / जातः शांतः स पावकः // 66 // इत्यादि दिव्यमस्त्रं य-त्पाश्चिदेप तंप्रति // हेलयैवाछिनद् पूर-मतुबमहिमो हरिः // 67 // श्तश्च शक्तिघाताः / देवदिन्नो विशख्यया // सजं रामवपुश्चके / पूरं नीत्वा रणांगणात् // 67 // अथ पद्मो विलक्षात्मा। चिरं ध्यात्वा च चेतसि // अवार्यमपरैरस्त्रै- रस्मार्षीच्चक्रमशुनृत् // ६ए / चक्रं सहस्रयदाढयं / द्रागागात्पाणिपल्लवे // स्मरे ष्टदेवतामेवं / जब्पन् पद्मो मुमोच तत् // 70 // कृतांतवक्त्रवत्क्रूरं / ज्वालामालाकरालितं // पतहियुदिवाप्रेक्ष्य-कल्पांतानलदारुणं // 1 // सूरसेनरामसेन-देव दिन्नादिनिटेः // आहन्यमानमप्युप्रै-रस्त्रैरस्खलितागमं // 55 // खेचरैरपि वै मुक्त-मार्ग जयनरातुरैः॥ | घटितं छादशादित्यै-रिवात्यंतं सुनासुरं // 73 // चक्रं प्रदक्षिणीकृत्य / हरिषेणमुरस्तले // . P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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