________________ 1e चरित्रं तस्रः स्त्रीः / सोऽथ रंजानुकारिणी // 6 // वसंतसुंदरी प्रेम-सुंदरी रतिसुंदरी // गुणसुंदर्यथो तासां / नामानि क्रमशोऽजवन् // 65 // द्वितीयमिव चेतास्ति / तृतीयमिव लोचनं // गुणसारानिधस्तस्य ।श्रेष्टिश्रेष्टः सुहृत्तमः // 66 // बभूव धनसारस्य / जांमागारी धनाकरः // सह तेनारुरोदायं। यानपात्रं समिनकः // 6 // छीपांतरगतः देमे-णातलाभः स्वजाग्यतः॥प्रापेकविशतिगुणं / गुणानां निलयोपमः।६०॥ तत्रैव गुणसारोऽपि / परिणिन्ये शुजाकृति // गुणश्रीःसंशिकां कन्यां / सादादिव गुणश्रियं ॥६ए। प्रशस्तवस्तुनितॄत्वा / यानं मित्रान्वितोऽचलत् // धनसारोऽनुकूलेन / वायुना कर्मणेरितः // // समुशांतर्वजन् कामा-तुरचित्तो धनाकरः ॥गु. पश्रिया समं हास्य-वाक्यानि परिजल्पति // 11 // सा सती लजाया नम्रा-नना किंचिन्न नापते // अन्यदा स तथा कुर्व-स्तत्प्रियेण विलोकितः // 2 // तेनाथ धनसारस्य / स्वरूपं तन्निरूपितं // तेनाकार्य निजो जांमा-गारीति विनिवारितः // 73 // नमोचितं न पुंसां स्या-त्परस्त्रीणामपीक्षणं // आलापने तु किं वाच्यं / वचनीयमतीव यत् // 4 // तत्त्वया नै व वक्तव्यं / किंचित्साकं गुणश्रिया // दाक्षिण्याबजाया नीत्या / तचः प्रत्यपद्यत // 5 // PP.AC.Gunratnasuri.M.S. Jun.Gun Aaradhak Trust.