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________________ चरित्रं 235 मुपायमवगम्य तं // चित्ते चिंतातुरो जज्ञे / देव दिन्ने पुराशय // ए // अन्यदा स समाहूय / सदसीति तमब्रवीत् // देवदिन्न त्वया कार्य / सर्व सिद्ध्यति हेलया // ए॥ अधुना ध. मराजस्य / पूतत्वे सत्वसागर // गड तस्य पुरस्ताच्च / वाच्यमेतत्त्वया रयात् // एए // अहं लक्ष्मीपुरेशेन / लक्ष्मीदेवनरेंदुना // यमराज तवोपांते / रुष्टेन प्रेषितोऽस्म्यहो // 300 // देशे ग्रामे पुरे करमा-दकस्मात्पातितो जवान् // सर्वदैवहरस्यस्म-नररत्नान्यनेकशः // १॥एतावंति दिनानि त्वं / पल्लीपवदुपेदितः // अयप्रति चेदेवं-विधं मुग्ध विधास्यसि // 2 // कीनाश स्व विनाशाय / विकि मामागतं तदा // पुरीं संयमिनी जम्नां / जग्नाश्च निजयोषितः . // 3 // इत्युक्त्वा मम संदेशान् / वलमानं स वक्ति यत् // अवधार्य समस्तं त-दिहैतव्यं त्वया रयात् // 4 // न त्वं यद्यपि पूतत्वे / प्रेषितुं सत्तमोचितः // परं नैतत्परः कर्तु। सहते नोत्सदेत च // 5 // नेति वक्तुमजानानो। देवदिन्नस्तमब्रवीत् // केनाध्वना नराधीश / गम्यते यमसद्मनि // 6 // बहुशः संति पाशांनः-प्रवेशप्रमुखाः परे // जाज्वल्यमानज्वलनः / पंथासन्नतरः परं // 7 // एवं वदति भूपाले / देवदिन्नेन जल्पितं // प्रस्थास्यामि गृहं गत्वा।। // P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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