SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 195
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ प्रत्येक // श्री। पद्मदेवस्य संनिधौ // 54 // सोऽपि पद्मपुरं गत्वा / नत्वैकांते तमब्रवीत् // कुमार प्रेषितो धात्र्या / राजहंस्या श्हास्म्यहं // 55 // विज्ञापितं तया तेऽदो-ऽमुकस्मिन् वा. सरे त्वया // त्वरया सायमेतव्यं / वनांतर्देवतागृहे // 56 // राजाय राजहंसी सा। राAryal जहंसीसरित्तव // आगमं प्रार्थयंत्यस्ति / पद्मोद्धासविधायिनः // 5 // आख्यानश्रवणादेव / पद्मदेवस्य मानसे // उवास राजहंसी सा / राजहंसीव मानसे // 50 // चचाल सपरिवार / प्राते संकेतिते दिने // वने सोऽश्वादिकं मुक्त्वा / मित्रेणैकेन संगतः // 55 // आगतो देवतागेहे / स्वयं चास्थात्तदंतरे // अत्रांतरे राजहंसी / कृता पाणिग्रहोचिता // 6 ॥युग्मं॥ स्नापिता सर्वसामग्या। विलिप्ता सुविलेपनैः // सर्वांगकृतभंगारा / सादालक्ष्मीरिवाबजौ / / // 61 // वादित्रगीतनृत्यायै-र्जायमाने कुतूहले // विवाहाख्ये महे प्राइ-राज्ञा प्रारंनिते सति // 6 // धात्र्या व्यज्ञापि राझोऽये / देवैषा परिणेष्यति // तदा देवीं वनस्थां सा ।प्र|| थम पूजयिष्यति // 63 // राशाज्ञायां प्रदत्तायां / संध्यायां स्वसखीयुतां // रथे निवेश्य तां || कन्यां / सा चचाल वनंप्रति // 64 // एकाकिन्यानया पूजा / कार्यात्रेत्यनिधाय सा // देव- / A C.Gunratnasuri M.S.. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy