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________________ प्रत्येक // प्रदाय पृथगावासं / निवासं तत्र कारितः // 55 // नैमित्तिकेन पृष्टेन / झानगर्नेण जः || पितं // मासांतेऽत्रान्यरूपेण / बांधवोऽस्य मिलिष्यति // 60 // इति देशांतरान्वीक्षा-परिचरित्रं क्लेशो न कारितः // गणयन् गमयामास / कथंचिछासरानयं // 61 // अथो त्वयि स्फुटीशए भृते / पूर्णमेतन्मनोरथैः // प्रतिझ्यापि चास्माकं / जवन्मेलनसंझया // 6 // नत्वा गुणधरो ऽवोच-दल्पाः संत्युपकारिणः // कृतज्ञा द्वित्रिचत्वारो-ऽधिकझः केवलं भवान् // 63 // उपकारे कृतेऽस्पेऽपि / महांतो बहुमन्वते // इत्याकर्ण्य नृपो दानं / तुष्टोऽदात्पारितोषिकं // 4 // विसृष्टोऽसौ नृपेणाप / गुणचंडस्य मंदिरं // तेनापि स्नानजोज्यादि-नक्तिस्तस्य विनिर्ममे // // 65 // उक्तं चावसरे वत्स / गम्यते तातमंदिरे // वयोविरहेणैष / खिद्यते हृद्यतीव यत् // 66 // यदासि निःसृतो रात्रौ / प्रातस्तातः पुनः पुनः // विलोकयन्नपश्यंस्त्वां / स गाढं व्याकुलोऽनवत् // 67 // आहारं नैव गृह्णाति / निशां न लनते पिता // जनन्यापि प रित्यतं / वराक्या जोजनादिकं // 67 // दुःस्थावस्थाविति प्रेदय / पितरौ प्रोक्तवानहं // वही विशामि वर्षांते / भ्रातरं नानयामि येत् // ६ए // मा केप्सीस्त्वं ते कार-मित्येवं वदतो. PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036472
Book TitlePratyekbuddh Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Vidya Prasarak Varg
PublisherJain Dharm Vidya Prasarak Varg
Publication Year1920
Total Pages356
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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