________________ चरित्रं प्रत्येक मागधाननात् // ए // अपूर्वः कोऽपि दाता त्वं / चिरं नंद ददासि // “अविद्यमानमा प्यात्म-न्यमानं मानमर्थिने // 10 // तस्मै संतुष्टचित्तः सन् / गुणी गुणधरो ददौ // दीनाराणां पंचशतीं / दानं मानपुरस्सरं // 10 // पुत्रदानमिदं बुध्ध्वा / श्रेष्टी रुष्टमना मनाक् // आकार्य तर्जयामास / शिदायै निजमंगजं // 11 // रे पुष्ट धृष्ट नवता / समस्तमपि मामके // कष्टादुपार्जितं वित्तं / नूनं निर्गमयिष्यते // 11 ॥धनमेवं ददानोऽपि / शोजते खजुजार्जितं // परकीयं ददानस्य / तत्र पीमा न काचन // 13 // उदश्रुनेत्रः पुत्रोऽथ / पतित्वा तातपादयोः॥ अवादीस्कृतमझाना-दपराधं दमख मे // 14 // पुन वं करिष्यामि / ततस्तातः पुनर्जगौ // वत्स प्रदीयते दानं / परं परिमितं हि तत् // 15 // नत्वा गुणधरः प्राह / परदेशाय तात मां // आदिशाहं यथा तत्र / गत्वा श्रियमुपानये // 16 // उवाच सहसाश्लिष्य / गलन्नेत्रजलः पिता // मा गड वत्स कुत्रापि / शिदार्थमिदमुच्यते // 17 // तथापि मनसोऽमर्षा-अजन्यां निःसृतः सुतः॥ तेजस्वी तुरगः किंवा / तर्जनं सहते क्वचित् // // 17 // सह सार्थेन केनापि / गबन प्राप महाटवीं // यावत्तन्मध्यमागछत् / स सार्थोऽर्थः / / ...P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust