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________________ देशरी भाषांतर // 15 // RECAUSESASUR | चौरलोप्तावनीं गन्तुं मन्त्रिणे दिष्टशक्ति तत् / प्रदाय पादुकाबन्दं भूपोऽप्यनुययौ भटान् // 45 // अन्वयः-दिष्ट शक्ति तत् पादुका द्वयं मंत्रिणे प्रदाय भूपः अपि चौर लोप्न अवनीं गंतुं भटान् अनुययौ.॥४५॥ अर्थः-जणावेली के शक्ति जेनी एवी ते बने पावडीओ मंत्रीने सोंपीने राजा पण ते चोरनी चोरीनो माल संताडवानी जगोए जवामाटे ते सुभटोनी पाछळ गयो. // 45 / / स तु चौरस्त्वरादूरमुक्तशूरसमुच्चयः। पुरग्रामान्तगर्मागैरेवागात्पदगुप्तये // 46 // _अन्वयः-सः चौरः तु त्वरा दूर मुक्त शूर समुच्चयः पद गुप्तये पुर ग्राम अंतगैः मार्गः एव अगाव . // 46 // अर्थः-ते चोर तो (पोताना) वेगथी सुभटोना समूहने (पाछळ) दूर छोडीने पगला संताढवामाटे शेहेरो तथा गांवडांओना छेदापरना मार्गोए थइनेज नाशवा लाग्यो. // 46 // . भयाकुलितचित्तोऽसौ किंचिद्वैराग्यवांस्ततः। दध्यावित्यद्य मे पापमत्युग्रं फलितं ध्रुवम् // 47 // ____ अन्वयः–ततः भय आकुलित चित्तः, असौ किंचित् वैराग्यवान् इति दथ्यौ, ध्रुवं अद्य मे भति उग्रं पापं फलितं. // 47 // अर्थः-पछी भयथी व्याकुल हृदयवाळो एवो ते केशरीचोर कइंक वैराग्य पामवाथी एम विचारवा लाग्यो के, खरेखर आजे मारं अति उग्र पाप प्रगटी निकल्युं छे. // 47 // SENSESARSHASTRORS PPA Gunratrasuri MS Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036448
Book TitleKeshari Kevali Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1929
Total Pages22
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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