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________________ 16 धर्मः | तिश्रुतं // 4 // ततो दावपि संविमौ / ततः स्थानात्समुबितौ // गृहीत्वा चारुपुष्पाणि / पूजयित्वा मा जिनेश्वरं // 5 // विधाय विधिना सम्य-संपूर्ण चैत्यवंदनं / / कृत्वा च सुप्रणिधानं / निष्क्रांती जिनमंदिरात् // 6 // युग्मं / गतौ दक्षिणदिग्नागे / तस्यैव जिनवेश्मनः / स प्रमृज्य ततस्तत्र / सुविशालं शिलातलं // 7 // सूरतेजास्ततस्तस्मिन्नुपविश्य सुधीरधीः // विविधानशनं कृत्वा / वक्तुमेवं प्रचक्रमे // 7 // नमोत्थुणं अरिहंताणं जगवंताणं' श्यादि. ते लोकपूयणिज / जगप्पईवे. जिणे जियारिंगणे // वंदामि जे अईए / अणाकालेण सिधिगए // // वंदामि सं. पयं जे / विहरंति महाविदेहवासम्मि // वंदामि जे जविसति / एसु पन्नरसु खेत्तेसु // 10 // वं. | दामि णिठियठे। अणाकालेण जे गया मोकं // तिबयरसिया-एहिं एहिं सक्वेवि // // 11 // वंदामि गणहरिंदे / देविंदनमंसिए महासत्ते // तीयाणागयन्नेए / संपयकालेवि जे ते न // 12 // वंदामि बारसंगी-समग्गसुयधारए महासत्ते / तीयाणागयसपश्-नेयगए सव्वगावे. ण // 13 // वंदामि वंदणिऊ / सदेवमणुयासुरस लोगस्म // दसपुविणो अईए / अणागए व. | दृमाणे थ॥ 14 // जे केश जगप्पहाणे / थायरिए पायरियमहासत्ते / / चरणकरणप्पहाणे / अ. P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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