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________________ धर्मः | // // जगबंधुर्जिनाधीशो / देवो नौ देवदेवता // दमावंतः श्रुताधारा / गुरुवश्च सुसाधवः / / | // // श्रूयते तद्दचो नित्यं / क्रियते पर्युपासना // क्रियाकाले पुनः सर्व / काकवासिनसन्निनं | // 60 // जिनाझा हृदयेऽस्माक-मनुष्टानं सकल्मषं // मोदाध्वनि स्थितस्येदं / प्रस्थानं नरकाध्वनि // 61 // ते शोच्या ये न जानति / सर्वज्ञमतमुज्ज्वलं // शोच्यानामपि ते शोच्या / झा. खा ये न प्रकुर्वते // 6 // आपादितचमत्कारा / इंग्जालिकसन्निजाः // बहवो विरलास्ते च / ये रंजितस्वमानसाः // // 63 // अंतःशून्या बहिः सारा / नित्यशो नोजनप्रियाः // ध्वनिसाराश्च संसारे / बहवो मर्दलो. पमाः // 65 !! अंतःसहासनोपेता / बहिश्च बकवृत्तयः // वाचंयमाः दमावतो / निःस्पृहा विरला जनाः // 65 // सुधर्मादिमुनींडाणां / मौनींद्रगुणधारिणां / जिनाझायोगयुक्तानां / धर्मप्रासाद योग्यता // 66 // तेनान वयमारूढा / मूढाः सन्मार्गवर्मनि / / कुकर्मकारका दत्त-सत्यंकारा न वाध्वनि // 67 // जगादाथाचयो देव / खदोषे यस्य दोषधीः // स धन्यो वंदनीयश्च / स धार्मिकशिरोमणिः // 60 // दोषबुद्धिः स्वदोषेषु / गुणबुर्गुिणेषु च // दोषेभ्यस्ते विरज्यंते / प्रवर्तते P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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