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________________ धर्मः // अमुचद्दीघनिःश्वासां-स्तदिनापूरणाशयः // 15 // उक्तं च-सीयंतपरियण जलियाण / पु. रिसाण धणविहीणाण // न हु नवरि कायराणं / गरुयाणवि चल मशविहवो // 16 // बचाण सा ततः कांतं / गब त्वं धनमंदिरं / / प्रातरेव समुदाय / यतोऽसावग्रजन्मने // 17 // हौ माषौ 357 जातरूपस्य / प्रथमाय प्रयवति // मायासीदपरः कश्चि-दर्धरात्रेऽपि निर्गतः // 17 // युग्मं / / चौरोऽयमिति मत्वा तै-गुहीतो दंडपाशिकैः // अास्थानसन्निषमस्य / राझस्तैरुपदर्शितः // 17 // तेनानाणि यथा विप्र / किमु युक्तं तवेदृशं॥ श्रमायी कधयामास / राज्ञः सत्यं स्वमाशयं // 20 // ततः संजातकारुण्यो / राजा तुष्टस्तदार्जवात् // अवादीत्तं द्विजं मुग्धं / वरं वृणु यथेप्सितं // 31 // स प्राहालोच्य याचिष्ये / राजाबालोचयस्व जोः // गत्वकांते ततश्चैव-मारब्धश्चिंतितुं यथा / / // // राजा तुष्टो ददात्यद्य / द्रव्यं मे तावदीप्सितं // माषहयेन किं कार्य / याचेऽहं माषपंचकं // 23 // नालं तांबूलमूटयेऽपि / नूनं तन्मे नविष्यति // दशमाषांस्ततो याचे / तेऽपि वस्त्रायसा. धकाः // 24 // मार्गयामि शतं नालं / तदप्यानरणाय मे // बंधुवर्गसमेतस्य / सहस्रोऽपि दशायते // 25 // प्रार्थयामि ततो लदं / दितीशं वरदायिनं // परोपकारकर्तृत्वे / लदमप्यतमं ततः | Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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