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________________ धर्मः / गेक्षणां // 11 // चलितः खजमादाय / नानुप्रनः सकौतुकः // समीपमागते तस्मिन् / मृगयूथं पलायितं // 12 // सांगजंगं सनिःश्वास / संत्रमन्त्रांतलोचनं / / सापि कंपितुमारब्धा / लतेव पव. नाहता / / 13 // जानुमतो नरेंऽस्य / पुत्रोऽहं भूमिगोचरः // दिङ्मोहमोहितो मूढो / बंबमोति 165 मृगेदणे // 14 // का त्वं कस्याथवा पुत्री / कानि नामादराणि ते // एकाकिन्या कथं सुनु / शून्यारण्यमलंकृतं // 15 // मनःप्रमोदकारीदं / सरः केनेह खानितं // केन वा कारितं चेद-मु. द्यानं नंदनोपमं // 16 // नद्यानांतर्महानेष / प्रासादः केन कारितः // समस्ति निकटे किंचिगोकुलं ग्राम एव वा / / 17 // अदत्वैवोत्तरं बाला / मार्गतो वलितेक्षणा // जूंगारंभं प्रकुर्वाणा / गता प्रासादसन्मुखी // 10 // स विलक्षः कुमारोऽपि / चिंतयामास मानसे // अहो अलौकिकी। कन्या / लोकाचारविवर्जिता // 15 // स्वयमेव समागत्य / पुरतो नुय प्रनिता // अदर्शितार्थिनावेन / सान्वयाख्यानपूर्वकं // 20 // तथापि कथितं नैव / किंचिदप्यनया मम / / अहो मयार्थिना नून-मात्माय मे लघूकृतः // 21 // सखेदश्च निरुत्साह-स्तैरेव चलितः पदैः // लताहेऽथ नो सापि / दृष्टा कनकसुंदरी // 22 // निजालयितुमारब्धः / स विलद इतस्ततः // विलोः | P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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