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________________ धर्म- | केसरी // 30 // मलयकेतुपस्य / पुरं प्राप्तो मनोहरं // ऋतुजा कृतसन्मानो। श्वश्वा च कृतस स्कृतिः // 40 // शहानि कतिचित्स्थित्वा / युक्तो मलयकेतुना // वरं विमानमारुह्य / ननसा स. | परिखदः // 41 // संप्राप्तश्च दणादेव / कुमारो हेमपत्तने / अतर्कितः समुत्तीर्णो / हेमसुंदरमंदिरे // 42 // युग्मं // किमेतदिति लोकेन / विस्मितेन विलोकितः // सस्नेहं सादरं स्निग्धं / गौरवे. | कुमारकः / / 43 // समासन्नोपविष्टश्च / पृष्टो राज्ञा सकौतुकं // कथं ऋमिचरो नृत्वा / नवांश्चा. | जनि खेचरः // 4 // लक्ष्मीसरस्वतीकटपे / के श्मे वरवालिके // परस्परविरुके चवितोंति कमाश्रिते // 45 // कथितं मेघनादेन / नरकेसरिचेष्टितं // राज्ञाचिंति यतो नास्ति / दुर्लनं शु.. कर्मणां // 46 // . . . . .. यत्रांतरे समायातं / प्रधानपुरुषयं // प्रविष्टं च सजामध्ये / प्रतिहारनिवेदितं // 4 // हे. मसुंदरराजेंद्र / नत्वा तेन समर्पितः // पितृलेखः कुमारस्य / स्वयं तेनापि वाचितः // 4 // यः थां-स्वस्तिश्रीरंगशालापुरीतो राजा रणकेसर नरकांतादेवीसमन्वितस्तत्रस्थं वत्सं नरकेसरिणं स. | स्नेहं सादरं समाश्लिष्य जुजाभ्यां समादिशति, यत्किं विस्मृता वयं कुमारस्य ? येनाद्यापि विलंब्य- | P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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