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________________ चाप्रयत्नेन / ग्रादितः सकलाः कलाः // यौवने च समारूढो / व्यूढोरस्को महानुजः // 24 // प्र. जाऽवनकृते धात्रा / निर्मितः सारपुद्गलैः // दात्रो धर्म श्वाजाति / सुंदराकृतिविग्रहः / / 55 / / मलयसुंदराजिख्यो / वयस्योऽस्य सतां वरः // हृदयमिव कुमारस्य / द्वितीयं वेधसा कृतं / / 56 // हे. मपुरादथायातो / मेघनादो नृपांगजः // धृतो दिनानि तत्रैव / कियंति नरकांतया // 17 // प्र. णम्य जणिता तेन / नरकांता कृतादरं // मातर्मातुलसंदिष्टं / कथयामि तवाग्रतः // 7 // मातु लेन समादिष्टं / कुमारेण ममांतिके | दिनानि कतिचिन्नून-मागंतव्यं यथा तथा // 17 // अदर्शने दृढं प्रेम / नश्यत्येव शरीरिणां // कालेन गबता वत्स / यथा हस्तपुटाकावं // ६०॥ज(णतो मातृपितृभ्यां / जवंतं मातुलो दृढं // समाह्वयति तद्वत्स / विलंबं गब मा कुरु // 61 // म. लयसुंदराढयेन / मेघनादेन संयुतः // प्रधानं रथमारुह्य / गतो हेमपुरंप्रति // 6 // कतिनिश्च दिनैस्तत्र / संप्राप्तो हेमपत्तने / हेमसुंदरजूपेन / सानंदमवलोकितः // 63 // तत्रैव तिष्टतस्तस्य / बहमानपुरस्सरं // नानाविधविनोदेन / क्रीडतो यांति वासराः // 64 // अन्यदा व महीपीठे / म | धुर्मन्मथबांधवः // जनितानेकधानंदो / जजूंने जगतीतले // 65 // मधुचंदसखः कामः / कदर्थिः PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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