________________ धम्मि-| वनावनिसरःकेलि-कलान्यासादि यध्यधात् // कुमारस्तस्य सोऽप्यासीत् / तृतीयं चकुरदतं // 64 // धम्मिलस्य कुमारस्य / सौहृदे हृदयाबुन्निः // रूपानेदोऽस्तिनधात्वो-रिवादर्शि न चार्थतः // 65 // कुमारस्य वयस्या ये / तेऽप्ययुस्तस्य वश्यतां // न हि साहित्यसौहित्यं / दूरे लदाणलक्षिणः // 610 // 66 // सर्वः पौरजनोऽरंजि / खं तेन न पुनर्गुहं // विधुर्धवलयत्येव / जगन्न तु निजं मृगं // | // 6 // विदग्धवदनात्तच्चा-श्रावि नृपवान्यदा // यदा न सुहृदां किंचिद्-दुयं ज्ञानिनामिव // ज्यास यादिक जे कई करतो हतो तेमां ते धम्मिल तेना त्रीजां यदायनेत्ररूप थपड्यो. // // 64 // धम्मिलनी अने ते राजकुमारनी मित्राश्वच्चे विद्वानोए यस् अने भूधातुनीपेठे फक्त रूपथी नेद जोयो, पण अर्थथी जोयो नहि. // 65 // हवे ते राजकुमारना जे मित्रो हता तेन पण ते धम्मिलने वश थर गया, केमके व्याकरण जाणनारने साहित्यनो सार कई दूर रहेतो नथी. // 66 // एवी रीते तेणे नगरना सर्व लोकोने रंजित कर्या, परंतु पोताना घरने ते रंजित करी शक्यो नहि, केमके चंद्र जगतने उज्ज्वल करे , परंतु पोताना हरिणने नज्ज्वल करी शकतो नथी. // 67 // एक दिवसे कोश्क चतुरने महोडेथी राजकुमारे ते वृत्तांत सांनब्यो, के. / Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.