________________ सार्थ धाग्य- मालोक्य प्रमुदितो। शिवतिर्ददौ सुतां // प्राग्दत्तां तामजानानः / शंखदत्ताय तदनुवे // 6 // काकतालीयकन्याया-दन्यैश्चाप्यमुनापि च // एकमेव ददे लमं / वैवाहिकजनेऽखिले // 7 // शिवचतिः समुत-प्रनृतप्रीतिनाजनं // प्रावीवृतन्महं गेहे / प्रीणितप्रमदाजनं // 70 // नबूल. ध्वनयश्चंद्र-मुखीनी मृदुमंजुलाः / महोत्सवाब्धिवीचीनां / ध्वनितानीव रेजिरे // 7 // स्वज नोत्कलिकाकृष्ट-वागालमवासरः // समं समेयरुस्ते च / वराः परिकरान्विताः // 70 // सहसा मित्राश्वाळो महेश्वरदत्त नामनो शेठ चंद्रपुरथी युतिलकपुरमा श्राव्यो. // 15 // तेने जोड्ने खुशी थयेला शिवतिए पूर्वनां सगपणोने नहि जाणवाथी तेना शंखदत्त नामना पुत्रने पोता. नी पुत्री पापी. // 16 // हवे काकतालीय न्यायथी बीजानए तथा था शेठे पण सर्व वेवाश्नने एकज दिवसर्नु लम थाप्यु. // 77 // पनी शिवतिए अत्यंत प्रीति नपजावनारो तथा स्त्रीन ने खुश करनारो विवाहमहोत्सव पोताने घेर चालु को. // 70 // चंडसरखां मुखवाळी स्त्रीननां कोमळ मनोहर गीतोना अवाजो महोत्सवरूपी समुद्रना मोजांना ध्वनिननीपेठे शोगवा लाग्या. // 70 // स्वजनोना नत्साहथी जाणे खेंचाइ आव्यो होय नहि तेम लमनो दिवस पण Jun Guna PP.AC.Gunratnasuri M.S.