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________________ घास- नृवुस्त्वयि रागिणः // 65 // तथाहि जबूढीपेऽत्रैखत-क्षेत्रे द्युतिलके पुरे // शिवचतिर्वितीनां / महेन्योऽजनि मंदिरं // 66 // // | महाश्रियां सधर्मिण्यां / तस्य शस्यकराकृतिः // अजायतं सुतः सिंहः / सिंहस्वप्नेन सूचितः // 6 // एए| अनुचंद्रकलास्वप्ना-चंद्रलेखास्य नंदिनी // यौवनं चंद्रलेखेव / वर्धमाना बनार सा // 60 // सिं | हो देवश्रियं कन्या-मवन्यां मेनकामिव / महेन्यसंनवां पित्रो-निर्देशादुदयबत // ६णा अथ वळ्वान बे, या लोको खरेखर पूर्वनवना अन्यासथी तारापते रागी थया हता. // 65 // ते कहे जे.. या जंबूहीपमा ऐवतक्षेत्रमा गुतिलक नामना नगरमां ऋधिना मंदिरसरखो शिवजूति नामे एक मोटो शेठ हतो. // 66 // तेने महाश्री नामनी स्त्रीथी सिंहस्वप्रथी सूचित थयेलो मनोहर प्राकृतिवाळो सिंह नामे पुत्र थयो. // 67 // वळी तेने चंद्रकलाना स्वप्रथी चंद्रलेखा नामे पुत्री थ, के जे चंनी कलानीपेठे वृधि पामीने यौवनावस्था पामी. / / 67 // हवे ते सिंह पोताना मातापितानी याकाथी पृथ्वीमा रहेली मेनकासरखी मोटा शाहुकारनी देवश्री नामनी कन्या परयो. // 65 // हवे ते नाना शिवचतिनो मोटो भाइ देवधर व्यापारनिमित्ते कनकपुर नामना न PPA Gunrainagu MS Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036433
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages204
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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