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________________ धांध- प्राहुर्विनोदिनः केचि-दहो नाग्यं कुमार ते // जिज्ञासिता थमी प्रादु-र्जुताश्च स्वयमेव यत् / / मा // 27 // परे प्राहुरहो नक्ता / नृपेऽमात्यादयस्त्रयः॥ न वस्वामिनमत्याक्षु-र्यदीहक्संकटेऽप्यमी | // // दशां नीतोऽसि केनेमां / तात तं हन्मि वेभि चेत् // एवं ब्रुवंतमाटोपा-पुत्रं नृपो न्यवारयत् // 25 // जोषं नजैष संरंनो / वृथा तत्वं न बुध्यसे / आकारय सदाकार / तामेव श्रे ष्टिनः प्रियां // 30 // राजाप्यथ समुबाय / धौतकायः शुनोदकैः // सिंहासनमलंचक्रे / नव्यशृंगाळसुधी पाश्चर्य न करखा लाग्या ? // 26 // वळी केटलाक मश्करान बोल्या के हे कुमार! तारं पण अहोनाग्य ! केमके जेननी तलास करवानी तारी श्बा हती तेज था पोतानीमेळेज प्र. गट थया ! // 27 // बीजा केटलाक बोल्या के यहो! या मंत्री श्रादिक त्रणे राजाना महा. जतो जणाय ! केमके तेजए यावा संकटमां पण पोताना स्वामीने गेड्यो नथी. // 20 // हे पिताजी! पापना यावा हाल कोणे कर्या ने? तेने हुं जाएं तो जीवथीज मारी नाखु, एवी रीते श्रामबरथी बोलता एवा पोताना ते पुत्रने राजाए अटकाव्यो, // 25 // (अने कहूं के) | हे उत्तम प्राकृतिवाळा पुत्र! तुं मौन रहे, तारो या जुस्सो नकामो मे, कैमके खरी बिनानी तने |
SR No.036433
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages204
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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