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________________ धम्मिा लिनी नवितव्यता || G // धम्मिलोनिदधे बाले / किमेवं खिद्यते वृया // दैवायत्ताः यतः कार्य -सिधिः किं तत्र शोचनैः // जय // साह साहसिकोत्तंस / न मे दुःखं मनागप्रि॥ चलत्यचल चूलेव / किं वाणी झानिनो मुनेः // 70 // यावदेतद्भववृत्तं / खेचर्योपियाम्यहं // तावदत्र प्र. | तीक्षेथाः / सौधमूनि बहक् // 1 // जोत्स्ये रागं मुनिप्रोक्त-प्रियप्राप्त्या तयोर्यदि // रोपयिध्ये पताकां त-द्रक्तां सौधस्य मूनि // ए॥ विरागश्चेत्तयो वी / तदा श्वेतां च तामिति // गदगदकं वोली के खरेखर नवितव्यता बलवान . // 7 // त्यारे धम्मिल बोल्यो के हे बालि. का! हवे तुं फोकट शामाटे खेद पामे बे ? केमके कार्यनी सिधि दैवाधीन , तेमां शोक कर वाथी शुं यवानुं ? || 7 || यारे ते कन्या बोली के हे साहसिकशिरोमणि! मने तो हवे जरा पण दुःख नथी, केमके पर्वतना शिखरनी पेठे शुंझानी मुनिनी वाणी चलायमान थाय ? // ए०॥ हवे हुँ जेटलामां या तारुं वृत्तांत तेनी बने विद्याधरीबहेनोने जणावं त्यांसुधी तारे या महेलनी टोचपर दृष्टि राखीने यहीं राह जो बेश. // 1 // मुनिए कहेला खामीनी प्राप्तिथी | जो हं तेनने खुशी थयेली जोश तो था महेलना शिखरपर हुं लाल रंगनी धजा चमावीश. P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036433
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages204
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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